बेटियां 🦋

दिन रात के कसरतों सेवो उसकी अनहद हसरतों से तनिक भी थका नहीं, कहीं भीरूका नहींपिता के उंगलियों से छूटकरबिटिया का हाथ यौवन ने कैसे छिना, पिता सेउसके प्रतिबिंब का साथपिता फिर से, भावनाओं में बह गया हैउसे जाने दिया, उड़ने दियाउसके फैसलों में, उसके हां मेंहां किया है मगर मां इतनी लाचार कहांउसमें पिता... Continue Reading →

जो चाहा, जो सोचा

जो रात सजा था ख्वाबों काआंखों में पहरा जिन यादों कासब टूट गए,सब बिखर गयेसफ़र सुहाना लगता था जोसुख का पैमाना लगता था जोसब मिट गए,सब लूट गएजो साथ बसर करते थेसंग रहा करते थेसब छूट गए,सब सिमट गएजो चाहा, जो सोचा जो ख्वाब बुने सब दुःख और दर्द के पर्याय बने।।

रास्तों को मोर आते हैं!

चलो चलते है रासतो को मोर आते है जितनी भी रोरे है , परसे राहों में अपने उन्हें तोड़ आते हैं मंजिल अपने सफ़र का क्या आखरी पड़ाव है थक के रुके ना कदम चलो की सारे बंधन तोड़ आते हैं चलो चलते हैं रास्तों को मोर आते हैं.... जो कारवा साथ में है अपनों... Continue Reading →

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