तेरी मौत मांगता हूं

उसकी मासूम आंखों से कैसे तुमने अपनी आंखें मिलाया होगाउसके चेहरे पर खीेलती मुस्कुराहट को कैसे तुमने रुलाया होगावह मासूम जो तुम्हारी बेटी सी हैउसे दर्द से कैसे तुम्नें तड़पाया होगाकैद करके रूह को अपनेतुमने कैसे अपनी मर्दानगी को आजमाया होगातुम्हें खुदा का डर नहीं मानता हूंतुमने कैसे अपनी बेटियों को भूलाया होगावो चिख तेरी... Continue Reading →

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तुझ पर मेरा हक है कितना सांझ का हो रात से जितना मुझे देख कर तू यूं ढल जाती हैं, क्षितिज पर डूबता सूरज हो और फासले हो भोर जितना। मोम सी हंसी होंठों पर जो टिमटिमाती है लौ हो जैसे दिलों को जलाती और बदन को सुलगाती है तेरी जुल्फों की घनेरी छांव में... Continue Reading →

आग है ,तो धुआं होगा!

निश्चितता की इस दुनिया में, कुछ बातें निश्चित होंगी सूर्य रोज सुबह उठ जाएगा, अंधकार सिमट जाएगा सो जाएंगे फिर ये मानव , किसी सच की तलाश में सुबह फिर से बैठे होंगे झूठी दुनिया के आस में, कहीं किसी की आंखें बरसती होंगी तो कहीं किसी के होठों , पर खुशियां थिरकती होंगी जो... Continue Reading →

मुझमें कहीं??

ये गम, मेरे इंतिहा ले न तू इतना, कि तेरी आरज़ू न थी मुझमें कहीं।। के उतर आए है सावन के दिन, मेरे पलकों के छांव में। कि ऐ मौसम , मेरे ज्जबातो को न तु भिंगा इतना, कि मेघों की चाह न थी मुझमें कहीं।। मैं उसके करीब होकर भी बिखड़ा हूं के दिल... Continue Reading →

कर्ज तेरा!!

कर्ज तेरा ,सोचा अदा कर दूं ईश दर्द को खुद से जुदा कर दूं इक दफा कहा था ,तुमने तुम मेरी,हंसी को चाहती हो। तुम होंठों पर सदा, मेरी इक हंसी को चाहती हो, तेरी ही ख्वाहिशों का पंख लेकर दुर क्षितिज में उड़ा हूं मैं, आसमां को नीचा दिखाकर फौलादी हौसलों सा खड़ा हूं... Continue Reading →

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