Holi

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चराग बुझाई गई है

इतिबार उन्हें अब मेरा न रहा मेरी कहीं हर बात़ अब यूं भूलाई गई है देख जिसे कभी लवों पर हंसी ठहरती थी अक्स को मेरे देख अब इक पल भी नहीं उनसे गुजारी गई है इस क़दर गैर बन गया मैं कुछ ही पलों में कभी वर्षों हमारी सोहबत में हर शाम गुजारी गई... Continue Reading →

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