रास्तों को मोर आते हैं!

चलो चलते है रासतो को मोर आते है जितनी भी रोरे है , परसे राहों में अपने उन्हें तोड़ आते हैं मंजिल अपने सफ़र का क्या आखरी पड़ाव है थक के रुके ना कदम चलो की सारे बंधन तोड़ आते हैं चलो चलते हैं रास्तों को मोर आते हैं.... जो कारवा साथ में है अपनों... Continue Reading →

चराग बुझाई गई है

इतिबार उन्हें अब मेरा न रहा मेरी कहीं हर बात़ अब यूं भूलाई गई है देख जिसे कभी लवों पर हंसी ठहरती थी अक्स को मेरे देख अब इक पल भी नहीं उनसे गुजारी गई है इस क़दर गैर बन गया मैं कुछ ही पलों में कभी वर्षों हमारी सोहबत में हर शाम गुजारी गई... Continue Reading →

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